azal ke qissa-go ne dil ki jo utaari dastaan | अज़ल के क़िस्सा-गो ने दिल की जो उतारी दास्ताँ

  - Ali Akbar Natiq
अज़लकेक़िस्सा-गोनेदिलकीजोउतारीदास्ताँ
कहींकहींसेउसनेतोबहुतसँवारीदास्ताँ
हुआसेजोसैरबींपुरानेमौसमोंकीहै
सुनासुनाकेथकगईमिरीतुम्हारीदास्ताँ
किसीकासायारहगयागलीकेऐनमोड़पर
उसीहबीबसाएसेबनीहमारीदास्ताँ
मिरीजबींपेसानेहातनेलिखीहैंअर्ज़ियाँ
येअर्ज़ियाँहैंहसरतोंकीएकभारीदास्ताँ
दिल-ए-ख़राब-ओ-ख़स्तापरनज़रतूनेकीबहाल
किउसमकाँकीतेरेगोशसौगुज़ारीदास्ताँ
  - Ali Akbar Natiq
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