kase kajaave mahmilon ke aur jaaga raat ka taara bhi | कसे कजावे महमिलों के और जागा रात का तारा भी

  - Ali Akbar Natiq
कसेकजावेमहमिलोंकेऔरजागारातकाताराभी
छोड़दीबस्तीनाक़ोंनेख़ामोशहुआनक़्क़ाराभी
चाँदसीआँखेंखेलरहीथींसुर्ख़पहाड़कीओटोंसे
पूरबओरसेताकरहाथाउठकरअब्रकापाराभी
क़ाफ़िलेगर्द-ए-सफ़रमेंडूबे,घंटियोंकीआवाज़घुटी
आख़िरीऊँटकीपुश्तपेडालारातनेसियाहगराराभी
शहरकेचौकमेंवीरानीहैआगबुझी,अंधेरहुआ
राखसरोंमेंडालकेबैठे,आजतिरेआवाराभी
कोईरस्तानापसकाहै,रेतपेचलनेवालोंका
अगलेक़दमपरमिटजाएगापहलानक़्शहमाराभी
  - Ali Akbar Natiq
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