hawa ke takht par agar tamaam umr tu raha | हवा के तख़्त पर अगर तमाम उम्र तू रहा

  - Ali Akbar Natiq
हवाकेतख़्तपरअगरतमामउम्रतूरहा
मुझेख़बरहोसकीसाथसाथमैंभीथा
चमकतेनूरकेदिनोंमेंतेरेआस्ताँसेदूर
वोमैंकिआफ़्ताबकीसफ़ेदशाख़परखिला
हिजाबगयाथामुझकोदिलकेइज़्तिराबपर
यहीसबबहैतेरेदरपेलौटकरसका
वोकिसमकाँकीधूपथी,गलीगलीमेंभरगई
वोकौनसब्ज़ा-रुख़थाजोकिमोमसापिघलगया
कभीतोचलकेदेखोसाएपीपलोंकेदेसके
जहाँलड़कपनाहमारेहाथसेजुदाहुआ
  - Ali Akbar Natiq
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