ashk-baari na mitti seena-figaari na gaii | अश्क-बारी न मिटी सीना-फ़िगारी न गई

  - Akhtar Shirani
अश्क-बारीमिटीसीना-फ़िगारीगई
लाला-कारीकिसीसूरतभीहमारीगई
कूचा-ए-हुस्नछुटातोहुएरुस्वा-ए-शराब
अपनीक़िस्मतमेंजोलिक्खीथीवोख़्वारीगई
उनकीमस्तानानिगाहोंकानहींकोईक़ुसूर
नासेहोज़िंदगीख़ुदहमसेसँवारीगई
चश्म-ए-महज़ूँपेलहराईवोज़ुल्फ़-ए-शादाब
येपरीहमसेभीशीशेमेंउतारीगई
मुद्दतेंहोगईंबिछड़ेहुएतुमसेलेकिन
आजतकदिलसेमिरेयादतुम्हारीगई
शादख़ंदाँरहेहमयूँँतोजहाँमेंलेकिन
अपनीफ़ितरतसेकभीदर्द-शिआरीगई
सैकड़ोंबारमिरेसामनेकीतौबामगर
तौबा'अख़्तर'कितिरीबादा-गुसारीगई
  - Akhtar Shirani
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