soo-e-kolkata jo ham b-dil-e-deewana chale | सू-ए-कलकत्ता जो हम ब-दिल-ए-दीवाना चले

  - Akhtar Shirani
सू-ए-कलकत्ताजोहमब-दिल-ए-दीवानाचले
गुनगुनातेहुएइकशोख़काअफ़्सानाचले
शहर-ए-सलमाहैसर-ए-राहघटाएँहमराह
साक़ियाआजतोदौर-ए-मय-ओ-पैमानाचले
इसतरहरेलकेहमराहरवाँहैबादल
साथजैसेकोईउड़ताहुआमय-ख़ानाचले
शहर-ए-जानाँमेंउतरनेकीथीहमपरक़दग़न
यूँँचलेजैसेकोईशहरसबेगानाचले
गरचेतन्हाथेमगरउनकेतसव्वुरकेनिसार
अपनेहम-राहलिएएकपरी-ख़ानाचले
खेलउम्मीदकेदेखोकिकीउनकोख़बर
फिरभीहममुंतज़िर-ए-जल्वा-ए-जानानाचले
उनकापैग़ामलाएहोंयेरंगींबादल
वर्नाक्यूँँसाथमिरेबे-ख़ुदमस्तानाचले
घरसेब-इशरत-ए-शाहानाहमआएथेमगर
उनकेकूचेसेचलेजबतोफ़क़ीरानाचले
बादलोख़िदमत-ए-सलमामेंयेकहदोजाकर
कितिरेशहरमेंहमकेग़रीबानाचले
हसरतशौक़केआलममेंचलेयूँँ'अख़्तर'
मुस्कुराताहुआजैसेकोईदीवानाचले
  - Akhtar Shirani
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