umr-bhar ki talkh bedaari ka saamaan ho gaiin | उम्र-भर की तल्ख़ बेदारी का सामाँ हो गईं

  - Akhtar Shirani
उम्र-भरकीतल्ख़बेदारीकासामाँहोगईं
हाएवोरातेंकिजोख़्वाब-ए-परेशाँहोगईं
मैंफ़िदाउसचाँदसेचेहरेपेजिसकेनूरसे
मेरेख़्वाबोंकीफ़ज़ाएँयूसुफ़िस्ताँहोगईं
उम्र-भरकम-बख़्तकोफिरनींदसकतीनहीं
जिसकीआँखोंपरतिरीज़ुल्फ़ेंपरेशाँहोगईं
दिलकेपर्दोंमेंथींजोजोहसरतेंपर्दा-नशीं
आजवोआँखोंमेंआँसूबनकेउर्यांहोगईं
कुछतुझेभीहैख़बरसोनेवालेनाज़से
मेरीरातेंलुटगईंनींदेंपरेशाँहोगईं
हाएवोमायूसियोंमेंमेरीउम्मीदोंकारंग
जोसितारोंकीतरहउठउठकेपिन्हाँहोगईं
बसकरोमेरीरोनेवालीआँखोंबसकरो
अबतोअपनेज़ुल्मपरवोभीपशेमाँहोगईं
आहवोदिनजोआएफिरगुज़रजानेकेबा'द
हाएवोरातेंकिजोख़्वाब-ए-परेशाँहोगईं
गुलशन-ए-दिलमेंकहाँ'अख़्तर'वोरंग-ए-नौ-बहार
आरज़ूएँचंदकलियाँथींपरेशाँहोगईं
  - Akhtar Shirani
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy