tilism-e-gumbad-e-be-dar kisi pe vaa na hua | तिलिस्म-ए-गुम्बद-ए-बे-दर किसी पे वा न हुआ

  - Akhtar Hoshiyarpuri
तिलिस्म-ए-गुम्बद-ए-बे-दरकिसीपेवाहुआ
शररतोलपकामगरशोला-ए-सदाहुआ
हमेंज़मानेनेक्याक्याआइनेदिखलाए
मगरवोअक्सजोआईना-आशनाहुआ
बयाज़-ए-जाँमेंसभीशे'रख़ूब-सूरतथे
किसीभीमिसरा-ए-रंगींकाहाशियाहुआ
जानेलोगठहरतेहैंवक़्त-ए-शामकहाँ
हमेंतोघरमेंभीरुकनेकाहौसलाहुआ
वोशहरआजभीमेरेलहूमेंशामिलहै
वोजिससेतर्क-ए-त'अल्लुक़कोइकज़मानाहुआ
यहीनहींकिसर-ए-शबक़यामतेंटूटीं
सहरकेवक़्तभीइनबस्तियोंमेंक्याहुआ
मैंदश्त-ए-जाँमेंभटककरठहरगया'अख़्तर'
फिरइसकेबादमिराकोईरास्ताहुआ
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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