tha ek saaya sa peeche peeche jo mud ke dekha to kuchh nahin tha | था एक साया सा पीछे पीछे जो मुड़ के देखा तो कुछ नहीं था

  - Akhtar Hoshiyarpuri
थाएकसायासापीछेपीछेजोमुड़केदेखातोकुछनहींथा
अबअपनीसूरतकोदेखताहूँकभीजोसद-पैकर-आफ़रींथा
वोफिरभीजाँसेअज़ीज़-तरथातबीअ'तेंगोजुदाजुदाथीं
अगरचेहम-ज़ादभीनहींथावोमेराहम-शक्लभीनहींथा
मैंरुकसकूँगाठहरसकूँगाथकनसफ़रकीमिटासकूँगा
कहींतोकोईशजरमिलेगातमामरस्तेयहीयक़ींथा
कईचटानेंगुदाज़जिस्मोंमेंअपनीगर्मीसेढलगईथीं
बुतोंकेक़िस्सेमेंतेशा-कारोंकातज़्किराभीकहींकहींथा
जानेक्याधुँददरमियाँथीकिकोहकनकीनज़रपहुँची
जहाँसेफूटाथाचश्मा-ए-माह-शबकापत्थरभीतोवहींथा
मैंअपनीआवाज़केतआक़ुबमेंमावरा-ए-नज़रभीपहुँचा
मगरपलटकरउसनेपूछाकिमैंख़लाकेबहुतक़रींथा
वहीमनाज़िरलुटेलुटेसेवहीशिकस्तामकान'अख़्तर'
मैंरोज़-मर्राकेरास्तेसेजोघरमेंपहुँचाबहुतहज़ींथा
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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