vo ratjaga tha ki afsun-e-khwaab taari tha | वो रतजगा था कि अफ़्सून-ए-ख़्वाब तारी था

  - Akhtar Hoshiyarpuri
वोरतजगाथाकिअफ़्सून-ए-ख़्वाबतारीथा
दिएकीलौपेसितारोंकारक़्सजारीथा
मैंउसकोदेखताथादम-ब-ख़ुदथाहैराँथा
किसेख़बरवोकड़ावक़्तकितनाभारीथा
गुज़रतेवक़्तनेक्याक्याचारासाज़ीकी
वगरनाज़ख़्मजोउसनेदियाथाकारीथा
दयार-ए-जाँमेंबड़ीदेरमेंयेबातखुली
मिरावजूदहीख़ुदनंगदोस्त-दारीथा
किसेबताऊँमैंअपनीनवाकीरम्ज़'अख़्तर'
किहर्फ़जोनहींउतरेमैंउनकाक़ारीथा
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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