dar-o-deewar pe ik saaya pada hai dekho | दर-ओ-दीवार पे इक साया पड़ा है देखो

  - Akhtar Hoshiyarpuri
दर-ओ-दीवारपेइकसायापड़ाहैदेखो
मेरेरस्तेमेंकोईजैसेखड़ाहैदेखो
ज़र्रा-ए-ख़ाककोसरपरलिएफिरतीहैहवा
औरपत्थरकिज़मींमेंहीगड़ाहैदेखो
इसक़दरभीड़हैरस्तेमेंकिचलनाहैमुहाल
औरबादलकिअभीसरपेखड़ाहैदेखो
अपनीहीज़ातकेसाएमेंछुपाबैठाहूँ
किमिरासायाभीतोमुझसेबड़ाहैदेखो
मौज-ए-दरियाकोसमुंदरसेमफ़रमुश्किलहै
लौटभीआओकियेरस्ताकड़ाहैदेखो
कोईतोआएमुझेकेबचाएइससे
मेरीदहलीज़पेइकशख़्सखड़ाहैदेखो
सरपेतूफ़ानभीहैसामनेगिर्दाबभीहै
मेरीहिम्मतकिवहीकच्चाघड़ाहैदेखो
सरकटाकरभीखड़ाहूँसर-ए-मैदाँअख़्तर
इसतरहजंगयहाँकौनलड़ाहैदेखो
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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