khwaahishein itni badhin insaan aadha rah gaya | ख़्वाहिशें इतनी बढ़ीं इंसान आधा रह गया

  - Akhtar Hoshiyarpuri
ख़्वाहिशेंइतनीबढ़ींइंसानआधारहगया
ख़्वाबजोदेखानहींवोभीअधूरारहगया
मैंतोउसकेसाथहीघरसेनिकलकरगया
औरपीछेएकदस्तकएकसायारहगया
उसकोतोपैराहनोंसेकोईदिलचस्पीथी
दुखतोयेहैरफ़्तारफ़्तामैंभीनंगारहगया
रंगतस्वीरोंकाउतरातोकहींठहरानहीं
अबकेवोबारिशहुईहरनक़्शफीकारहगया
उम्रभरमंज़र-निगारीख़ूनमेंउतरीरही
फिरभीआँखोंकेमुक़ाबिलएकदरियारहगया
रौनक़ेंजितनीथींदहलीज़ोंसेबाहरगईं
शामहीसेघरकादरवाज़ाखुलाक्यारहगया
अबकेशहर-ए-ज़िंदगीमेंसानेहाऐसाहुआ
मैंसदादेताउसेवोमुझकोतकतारहगया
तितलियोंकेपरकिताबोंमेंकहींगुमहोगए
मुट्ठियोंकेआईनेमेंएकचेहरारहगया
रेलकीगाड़ीचलीतोइकमुसाफ़िरनेकहा
देखनावोकोईस्टेशनपेबैठारहगया
मैंकहताथाकिउजलतइसक़दरअच्छीनहीं
एकपटखिड़कीकाकरदेखलोवारहगया
लोगअपनीकिर्चियाँचुनचुनकेआगेबढ़गए
मैंमगरसामानइकट्ठाकरतातन्हारहगया
आजतकमौज-ए-हवातोलौटकरआईनहीं
क्याकिसीउजड़ेनगरमेंदीपजलतारहगया
उँगलियोंकेनक़्शगुल-दानोंपेआतेहैंनज़र
आओदेखेंअपनेअंदरऔरक्याक्यारहगया
धूपकीगर्मीसेईंटेंपकगईंफलपकगए
इकहमाराजिस्मथा'अख़्तर'जोकच्चारहगया
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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