rukhsat-e-raqs bhi hai paanv men zanjeer bhi hai | रुख़्सत-ए-रक़्स भी है पाँव में ज़ंजीर भी है

  - Akhtar Hoshiyarpuri
रुख़्सत-ए-रक़्सभीहैपाँवमेंज़ंजीरभीहै
सर-ए-मंज़रमगरइकबोलतीतस्वीरभीहै
मेरेशानोंपेफ़रिश्तोंकाभीहैबार-ए-गिराँ
औरमिरेसामनेइकमलबेकीतामीरभीहै
ज़ाइचाअपनाजोदेखाहैतोसरयादआया
जैसेइनहाथोंपेकंदाकोईतक़दीरभीहै
ख़्वाहिशेंख़ूनमेंउतरीहैंसहीफ़ोंकीतरह
इनकिताबोंमेंतिरेहाथकीतहरीरभीहै
जिससेमिलनाथामुक़द्दरवोदोबारामिला
औरइम्काँथाजिसकावोइनाँ-गीरभीहै
सर-ए-दीवारनविश्तेभीकईदेखताहूँ
पस-ए-दीवारमगरहसरत-ए-तामीरभीहै
मैंयेसमझाथासुलगताहूँफ़क़तमैंहीयहाँ
अबजोदेखातोयेएहसासहमा-गीरभीहै
यूँँदेखोकिज़मानामुतवज्जाहोजाए
किइसअंदाज़-ए-नज़रमेंमिरीतश्हीरभीहै
मैंनेजोख़्वाबअभीदेखानहींहै'अख़्तर'
मेराहरख़्वाबउसीख़्वाबकीता'बीरभीहै
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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