पहलेतोसोचकेदोज़ख़मेंजलाताहैमुझे
फिरवोशीशेमेंमिराचेहरादिखाताहैमुझे
शायदअपनाहीतआक़ुबहैमुझेसदियोंसे
शायदअपनाहीतसव्वुरलिएजाताहैमुझे
बाहरआवाज़ोंकाइकमेलालगाहैदेखो
कोईअंदरसेमगरतोड़ताजाताहैमुझे
यहीलम्हाहैकिमैंगिरकेशिकस्ताहोजाऊँ
सूरत-ए-शीशावोहाथोंमेंउठाताहैमुझे
जिस्ममिनजुमला-ए-आशोब-ए-क़यामतठहरा
देखूँकौनआकेक़यामतसेबचाताहैमुझे
ज़लज़लाआयातोदीवारोंमेंदबजाऊँगा
लोगभीकहतेहैंयेघरभीडराताहैमुझे
कितनाज़ालिमहैमिरीज़ातकापैकर'अख़्तर'
अपनीहीसाँसकीसूलीपेचढ़ाताहैमुझे