dard ki daulat-e-naayaab ko rusva na karo | दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो

  - Akhtar Hoshiyarpuri
दर्दकीदौलत-ए-नायाबकोरुस्वाकरो
वोनज़रराज़हैउसराज़काचर्चाकरो
वुसअ'त-ए-दश्तमेंदीवानेभटकजातेहैं
दोस्तोआहु-ए-रम-ख़ुर्दाकापीछाकरो
तुममुक़द्दरकासिताराहोमिरेपासरहो
तुमजबीन-ए-शब-ए-नमनाकपेउभराकरो
पस-ए-दीवारभीदीवारकाआलमहोगा
तुमयूँँहीरौज़न-ए-दीवारसेझाँकाकरो
घरपलटआनेमेंआफ़ियत-ए-जाँहैयारो
जबहवातेज़चलेराहमेंठहराकरो
यादिल-ओ-दीदाकोतनवीर-ए-मोहब्बतबख़्शो
यादम-ए-सुब्हज़मानेमेंउजालाकरो
येजहान-ए-गुज़राँहाथकिसेआयाहै
पीछेमुड़मुड़केकिसीशख़्सकोदेखाकरो
भागतेलम्हेकोकबरोकसकाहैकोई
वोतोइकसायाहैसाएकीतमन्नाकरो
सरसलामतनहींरहतेहैंज़बाँकटतीहै
पत्थरोंकोकभीभूलेसेभीसज्दाकरो
प्यासबुझतीहैकहाँतपतेबयाबानोंकी
मिरीआँखोंमिरीआँखोंयूँँहीबरसाकरो
ज़ीस्तहैतेज़-क़दमआगेनिकलजाएगी
तुमकिसीमोड़पेरुकनेकाइरादाकरो
कुछइधरसाएहैंजोबढ़केलिपटजातेहैं
'अख़्तर'इसराहसेहोकरकभीगुज़राकरो
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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