baarha thithka hooñ KHud bhi apna saaya dekh kar | बारहा ठिठका हूँ ख़ुद भी अपना साया देख कर

  - Akhtar Hoshiyarpuri
बारहाठिठकाहूँख़ुदभीअपनासायादेखकर
लोगभीकतराएक्याक्यामुझकोतन्हादेखकर
मुझकोइसकाग़मनहींसैलाबमेंघरबहगए
मुस्कुरायाहूँमैंबे-मौसमकीबरखादेखकर
रेतकीदीवारमेंशामिलहैख़ून-ए-ज़ीस्तभी
हवाओसोचकरमौज-ए-दरियादेखकर
अपनेहाथोंअपनीआँखेंबंदकरनीपड़गईं
निगहत-ए-गुलकेजिलौमेंगर्द-ए-सहरादेखकर
मेरेचेहरेपरख़राशेंहैंलकीरेंहाथकी
मेरीक़िस्मतपढ़नेवालेमेराचेहरादेखकर
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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