khwaab-mahal men kaun sar-e-shaam aa kar patthar maarta hai | ख़्वाब-महल में कौन सर-ए-शाम आ कर पत्थर मारता है

  - Akhtar Hoshiyarpuri
ख़्वाब-महलमेंकौनसर-ए-शामकरपत्थरमारताहै
रोज़इकताज़ाकाँचकाबर्तनहाथसेगिरकरटूटताहै
मकड़ीनेदरवाज़ेपेजालेदूरतलकबुनरक्खेहैं
फिरभीकोईगुज़रेदिनोंकीओटसेअंदरझाँकताहै
शोरसाउठतारहताहैदीवारेंबोलतीरहतीहैं
शामअभीतकनहींपातीकोईखिलौनेतोड़ताहै
अव्वल-ए-शबकीलोरीभीकबकामकिसीकेआतीहै
दिलवोबचाअपनीसदापरकच्चीनींदसेजागताहै
अंदरबाहरकीआवाज़ेंइकनुक़्तेपरसिमटीहैं
होताहैगलियोंमेंवावेलामेरालहूजबबोलताहै
मेरीसाँसोंकीलर्ज़िशमंज़रकाहिस्साबनतीहै
देखताहूँमैंखिड़कीसेजबशाख़पेपत्ताकाँपताहै
मेरेसिरहानेकोईबैठाढारसदेतारहताहै
नब्ज़पेहाथभीरखताहैटूटेधागेभीजोड़ताहै
बादलउठेयाकिउठेबारिशभीहोयाकिहो
मैंजबभीगनेलगताहूँवोसरपरछतरीतानताहै
वक़्तगुज़रनेकेहम-राहबहुतकुछसीखा'अख़्तर'ने
नंगेबदनकोकिरनोंकेपैराहनसेअबढाँपताहै
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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