main harf dekhooñ ki raushni ka nisaab dekhooñ | मैं हर्फ़ देखूँ कि रौशनी का निसाब देखूँ

  - Akhtar Hoshiyarpuri
मैंहर्फ़देखूँकिरौशनीकानिसाबदेखूँ
मगरयेआलमकिटहनियोंपरगुलाबदेखूँ
पुरानेख़्वाबोंसेरेज़ारेज़ाबदनहुआहै
येचाहताहूँकिअबनयाकोईख़्वाबदेखूँ
येरास्तेतोमिरीहथेलीकेतर्जुमाँहैं
मैंइनलकीरोंमेंज़िंदगीकीकिताबदेखूँ
मुराजअ'तकासफ़रतोमुमकिननहींरहाहै
मैंचलताजाऊँकिमौसमोंकाअज़ाबदेखूँ
मैंअपनीतस्वीरदेखकरमुतमइनकहाँहूँ
वोदिनभीआएलहूकोजबकामयाबदेखूँ
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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