mirii nigaah ka paighaam be-sada jo hua | मिरी निगाह का पैग़ाम बे-सदा जो हुआ

  - Akhtar Hoshiyarpuri
मिरीनिगाहकापैग़ामबे-सदाजोहुआ
वोमेरीबातसुनेक्यूँँमैंबे-नवाजोहुआ
सवाद-ए-शहरमेंमिलतेहैंलोगसंग-ब-दस्त
सवाद-ए-शहरससहराकोरास्ताजोहुआ
मिलातूतोग़म-ए-ज़िंदगीकेदीवाने
इधरहीलौटपड़ेमैंतेरापताजोहुआ
तमामरातमैंसुनतारहातिरीआवाज़
तिराख़यालहीमुझकोतिरीसदाजोहुआ
हवा-ए-गुलभीपरेशाँक़बा-ए-गुलभीचाक
जुनूँकाफ़स्ल-ए-बहाराँसेराब्ताजोहुआ
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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