apne qadmon hi ki awaaz se chauka hota | अपने क़दमों ही की आवाज़ से चौंका होता

  - Akhtar Hoshiyarpuri
अपनेक़दमोंहीकीआवाज़सेचौंकाहोता
यूँँमिरेपाससेहोकरकोईगुज़राहोता
चाँदनीसेभीसुलगउठताहैवीराना-ए-जाँ
येअगरजानतेसूरजहीकोचाहाहोता
ज़िंदगीख़्वाब-ए-परेशाँहैबहारएकख़याल
इनकोमिलनेसेबहुतपहलेयेसोचाहोता
दोपहरगुज़रीमगरधूपकाआलमहैवही
कोईसायाकिसीदीवारसेउतराहोता
रेतउड़उड़केहवाओंमेंचलीआतीहै
शहर-ए-अरमाँसर-ए-सहराबसायाहोता
आरज़ूउम्र-ए-गुरेज़ाँतोनहींतुमतोनहीं
येसरकताहुआलम्हाकहींठहराहोता
पीछेपीछेकोईसायासाचलाआताथा
हाएवोकौनथामुड़करउसेदेखाहोता
तुझसेयकगोतअ'ल्लुक़मुझेइकउम्रसेथा
ज़िंदगीतूनेहीबढ़करमुझेरोकाहोता
जानेक्यासोचकेलोगोंनेबुझाएहैंचराग़
रातकटतीतोसहरहोतीउजालाहोता
अपनेदामनकोजलाकरमैंचराग़ाँकरता
अगरइसराखमें'अख़्तर'कोईशो'लाहोता
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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