kuchh naqsh huwaida hain khayaalon ki dagar se | कुछ नक़्श हुवैदा हैं ख़यालों की डगर से

  - Akhtar Hoshiyarpuri
कुछनक़्शहुवैदाहैंख़यालोंकीडगरसे
शायदकभीगुज़राहूँमैंइसराह-गुज़रसे
गलियाँभीहैंसुनसानदरीचेभीहैंख़ामोश
क़दमोंकीयेआवाज़दरआईहैकिधरसे
ताक़ोंमेंचराग़ोंकाधुआँजमसागयाहै
अबहमभीनिकलतेनहींउजड़ेहुएघरसे
क्यूँँकाग़ज़ीफूलोंसेसजातानहींघरको
इसदौरकोशिकवाहैमिरेज़ौक़-ए-हुनरसे
साएकीतरहकोईतआ'क़ुबमेंरवाँहै
अबबचकेकहाँजाएँगेइकशो'बदा-गरसे
'अख़्तर'येघनेअब्रबड़ेतंग-नज़रहैं
उठ्ठेहैंजोदरियासेतोदरियापेहीबरसे
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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