ye mohabbat ki jawaani ka samaan hai ki nahin | ये मोहब्बत की जवानी का समाँ है कि नहीं

  - Akhtar Ansari Akbarabadi
येमोहब्बतकीजवानीकासमाँहैकिनहीं
अबमिरेज़ेर-ए-क़दमकाहकशाँहैकिनहीं
दामन-ए-रिन्द-ए-बला-नोशकोदेखसाक़ी
पर्चम-ए-ख़्वाजगी-ए-कौन-ओ-मकाँहैकिनहीं
मुस्कुरातेहुएगुज़रेथेइधरसेकुछलोग
आजपुर-नूरगुज़र-गाह-ए-ज़माँहैकिनहीं
हुस्नहीहुस्नहैगुलज़ार-ए-जुनूँमेंरक़्साँइश्क़काआलम-ए-सद-रंगजवाँहैकिनहीं
राहपरहीगएआजभटकनेवाले
राहबरदेखवोमंज़िलकानिशाँहैकिनहीं
लाखगिर्दाब-ओ-तलातुमसेगुज़रकरदोस्त
अबसफ़ीनामिरासाहिलपेरवाँहैकिनहीं
तज़्किरेअपनेहरइकबज़्ममेंहैं'अख़्तर'
आजमोहमलसीहदीस-ए-दिगराँहैकिनहीं
  - Akhtar Ansari Akbarabadi
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