har lamha ata karta hai paimaana sa ik shaKHs | हर लम्हा अता करता है पैमाना सा इक शख़्स

  - Akhtar Ansari Akbarabadi
हरलम्हाअताकरताहैपैमानासाइकशख़्स
आँखोंमेंलिएबैठाहैमय-ख़ानासाइकशख़्स
औरइसकेसिवाअंजुमन-ए-नाज़मेंक्याहै
हैशम्अ'साइकशख़्सतोपरवानासाइकशख़्स
ख़ामोशनिगाहोंमेंक़यामतकाअसरथा
गुज़राहैसुनाताहुआअफ़्सानासाइकशख़्स
इकहुस्न-ए-मुकम्मलहैतोइकइश्क़-सरापा
होश्यारसाइकशख़्सहैदीवानासाइकशख़्स
हमजल्वा-ए-अस्नामसेबेज़ारहैंलेकिन
मिलताहैवहाँरूह-ए-सनम-ख़ानासाइकशख़्स
  - Akhtar Ansari Akbarabadi
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