yuñ badalti hai kahii barq-o-sharar ki soorat | यूँँ बदलती है कहीं बर्क़-ओ-शरर की सूरत

  - Akhtar Ansari Akbarabadi
यूँँबदलतीहैकहींबर्क़-ओ-शररकीसूरत
क़ाबिल-ए-दीदहुईहैगुल-ए-तरकीसूरत
ज़ुल्फ़कीआड़मेंथीजान-ए-नज़रकीसूरत
रातगुज़रीतोनज़रआईसहरकीसूरत
उनकेलबपरहैतबस्सुममिरीआँखोंमेंसुरूर
क्यादिखाईहैदु'आओंनेअसरकीसूरत
क़ाफ़िलेवालोनएक़ाफ़िला-सालारआए
अबबदलजाएगीअंदाज़-ए-सफ़रकीसूरत
क्याकरिश्माहैमिरेजज़्बा-ए-आज़ादीका
थीजोदीवारकभीअबहैवोदरकीसूरत
अबकोईहौसला-अफ़ज़ा-ए-हुनरहै'अख़्तर'
अबनज़रआएगीअर्बाब-ए-हुनरकीसूरत
  - Akhtar Ansari Akbarabadi
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