shaairo hadd-e-qadamat se nikal kar dekho | शाइरो हद्द-ए-क़दामत से निकल कर देखो

  - Akhtar Ansari Akbarabadi
शाइरोहद्द-ए-क़दामतसेनिकलकरदेखो
दास्तानोंकेअबउनवानबदलकरदेखो
क्यूँँहोतक़लीद-ए-कलीमआजभीदीदा-वरो
दीदनीहोकोईजल्वातोसँभलकरदेखो
शम-ओ-परवानाकाअंदाज़नयाहैकिनहीं
ज़िक्रथाजिसकाअबउसबज़्ममेंचलकरदेखो
औरभीरुख़नज़रआएँगेतजल्लीकेअभी
रुख़निगाहोंकेज़राऔरबदलकरदेखो
अगलेवक़्तोंकेफ़सानेसुनाओयारो
नएमाहौलकेसाँचेमेंभीढलकरदेखो
कलकेअंदाज़भीदिलकशथेयेतस्लीममगर
आजभीशहर-ए-निगाराँमेंनिकलकरदेखो
अपनेअहबाबकीजानिबउठाओनज़रें
देखनाहैअगर'अख़्तर'तोसँभलकरदेखो
  - Akhtar Ansari Akbarabadi
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