hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Arihant jain
muqaddar se nahin zyaada juta saka tamannaayein
muqaddar se nahin zyaada juta saka tamannaayein | मुकद्दर से नहीं ज़्यादा जुटा सकता तमन्नाएँ
- Arihant jain
मुकद्दर
से
नहीं
ज़्यादा
जुटा
सकता
तमन्नाएँ
तू
लकड़ी
पेड़
में
जितनी
है
उतनी
काट
सकता
है
- Arihant jain
Download Sher Image
कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
Send
Download Image
30 Likes
ये
रंग
रंग
परिंदे
ही
हम
से
अच्छे
हैं
जो
इक
दरख़्त
पे
रहते
हैं
बेलियों
की
तरह
Khaqan Khavar
Send
Download Image
21 Likes
हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
Send
Download Image
2 Likes
तेरी
निगाह-ए-नाज़
से
छूटे
हुए
दरख़्त
मर
जाएँ
क्या
करें
बता
सूखे
हुए
दरख़्त
हैरत
है
पेड़
नीम
के
देने
लगे
हैं
आम
पगला
गए
हैं
आपके
चू
में
हुए
दरख़्त
Read Full
Varun Anand
Send
Download Image
95 Likes
शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
Send
Download Image
31 Likes
इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
Send
Download Image
3 Likes
वो
पास
क्या
ज़रा
सा
मुस्कुरा
के
बैठ
गया
मैं
इस
मज़ाक़
को
दिल
से
लगा
के
बैठ
गया
दरख़्त
काट
के
जब
थक
गया
लकड़हारा
तो
इक
दरख़्त
के
साए
में
जा
के
बैठ
गया
Read Full
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
98 Likes
आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
Read Full
Ashu Mishra
Send
Download Image
38 Likes
एक
पत्ता
शजर-ए-उम्र
से
लो
और
गिरा
लोग
कहते
हैं
मुबारक
हो
नया
साल
तुम्हें
Unknown
Send
Download Image
34 Likes
इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
Read Full
Farhat Abbas Shah
Send
Download Image
69 Likes
Read More
बाग
से
हर
बार
केवल
फूल
ही
हमने
चुने
और
कांटे,
और
तीखे,
और
तीखे
हो
गए
Arihant jain
Send
Download Image
0 Likes
इस
रंग-ए-लहू
से
तू,
क्या
टीस
मिलाता
है
हर
बार
नतीजा
भी,
नीयत
से
नहीं
मिलता
Arihant jain
Send
Download Image
1 Like
भुलाकर
रंज
क़ातिल
से
भी
अपना
आश्ना
देखें?
बड़ा
मुश्किल
है
आतिश
आब
में
अपना
ख़ुदा
देखें
कई
मल्लाह
दरिया
में
है
अपनी
छानते
नेकी
तो
अब
तिनके
के
जिम्में
है
किसी
को
डूबता
देखें
ज़रूरत
आम
सी
शय
की
कहीं
वहशत
न
बन
जाए
कोई
हैरत
नहीं
गर
अब्र
में
सहरा
नशा
देखे
Read Full
Arihant jain
Download Image
1 Like
रौंद
कर
जो
कुछ
गया
हूँ
साथ
नक्श-ए-पा
में
है
जुड़
गया
है
दर्द
मुस्तक़बिल
में
मेरे
जुर्म
का
Arihant jain
Send
Download Image
0 Likes
गाँव
के
जितने
दीए
थे
शहर
जा
रौशन
हुए
रौशनी
को
देख
कैसे
खींचती
है
रौशनी
Arihant jain
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Hindustan Shayari
Diwangi Shayari
Hug Shayari
Aasra Shayari
Aadat Shayari