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Arihant jain
bhulaakar ranj qaatil se bhi apna aashna dekhen
bhulaakar ranj qaatil se bhi apna aashna dekhen | भुलाकर रंज क़ातिल से भी अपना आश्ना देखें?
- Arihant jain
भुलाकर
रंज
क़ातिल
से
भी
अपना
आश्ना
देखें?
बड़ा
मुश्किल
है
आतिश
आब
में
अपना
ख़ुदा
देखें
कई
मल्लाह
दरिया
में
है
अपनी
छानते
नेकी
तो
अब
तिनके
के
जिम्में
है
किसी
को
डूबता
देखें
ज़रूरत
आम
सी
शय
की
कहीं
वहशत
न
बन
जाए
कोई
हैरत
नहीं
गर
अब्र
में
सहरा
नशा
देखे
- Arihant jain
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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अब
तो
दरिया
सूख
चुका
है
अब
तो
इस
शम्मा
को
बुझा
दो
Siddharth Saaz
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किसी
ने
कहा
था
टूटी
हुई
नाव
में
चलो
दरिया
के
साथ
आप
की
रंजिश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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दरिया
की
वुसअतों
से
उसे
नापते
नहीं
तन्हाई
कितनी
गहरी
है
इक
जाम
भर
के
देख
Adil Mansuri
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
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बाग
से
हर
बार
केवल
फूल
ही
हमने
चुने
और
कांटे,
और
तीखे,
और
तीखे
हो
गए
Arihant jain
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इस
रंग-ए-लहू
से
तू,
क्या
टीस
मिलाता
है
हर
बार
नतीजा
भी,
नीयत
से
नहीं
मिलता
Arihant jain
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गाँव
के
जितने
दीए
थे
शहर
जा
रौशन
हुए
रौशनी
को
देख
कैसे
खींचती
है
रौशनी
Arihant jain
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रौंद
कर
जो
कुछ
गया
हूँ
साथ
नक्श-ए-पा
में
है
जुड़
गया
है
दर्द
मुस्तक़बिल
में
मेरे
जुर्म
का
Arihant jain
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बड़ा
मुश्किल
है,
मुश्किल
में,
तेरे
हक़
में
सदा
देगी
ख़िजाँ
में
हर
बचे
पत्ते
को
ये
दुनिया
हवा
देगी
Arihant jain
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