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Arihant jain
baag se har baar keval phool hi hamne chune
baag se har baar keval phool hi hamne chune | बाग से हर बार केवल फूल ही हमने चुने
- Arihant jain
बाग
से
हर
बार
केवल
फूल
ही
हमने
चुने
और
कांटे,
और
तीखे,
और
तीखे
हो
गए
- Arihant jain
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उम्र
गुज़री
है
माँजते
ख़ुद
को
साफ़
हैं
पर
चमक
नहीं
पाए
डाल
ने
फूल
की
तरह
पाला
ख़ार
थे
ना
महक
नहीं
पाए
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Vishal Bagh
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ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
Subhan Asad
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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काँटा
सा
जो
चुभा
था
वो
लौ
दे
गया
है
क्या
घुलता
हुआ
लहू
में
ये
ख़ुर्शीद
सा
है
क्या
Ada Jafarey
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माना
कि
इस
ज़मीं
को
न
गुलज़ार
कर
सके
कुछ
ख़ार
कम
तो
कर
गए
गुज़रे
जिधर
से
हम
Sahir Ludhianvi
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एक
तितली
से
वा'दा
है
सो
गुलशन
में,
ग़लती
से
भी
ख़ार
नहीं
देखूँगा
मैं
(ख़ार-
काँटें
)
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Darpan
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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उलटे
सीधे
सपने
पाले
बैठे
हैं
सब
पानी
में
काँटा
डाले
बैठे
हैं
Shakeel Jamali
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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तुम्हें
ये
दुनिया
कभी
फूल
तो
नहीं
देगी
मिले
हैं
काँटे
तो
काँटों
को
ही
गुलाब
करो
Madan Mohan Danish
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गाँव
के
जितने
दीए
थे
शहर
जा
रौशन
हुए
रौशनी
को
देख
कैसे
खींचती
है
रौशनी
Arihant jain
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मुकद्दर
से
नहीं
ज़्यादा
जुटा
सकता
तमन्नाएँ
तू
लकड़ी
पेड़
में
जितनी
है
उतनी
काट
सकता
है
Arihant jain
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भुलाकर
रंज
क़ातिल
से
भी
अपना
आश्ना
देखें?
बड़ा
मुश्किल
है
आतिश
आब
में
अपना
ख़ुदा
देखें
कई
मल्लाह
दरिया
में
है
अपनी
छानते
नेकी
तो
अब
तिनके
के
जिम्में
है
किसी
को
डूबता
देखें
ज़रूरत
आम
सी
शय
की
कहीं
वहशत
न
बन
जाए
कोई
हैरत
नहीं
गर
अब्र
में
सहरा
नशा
देखे
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Arihant jain
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इस
रंग-ए-लहू
से
तू,
क्या
टीस
मिलाता
है
हर
बार
नतीजा
भी,
नीयत
से
नहीं
मिलता
Arihant jain
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रौंद
कर
जो
कुछ
गया
हूँ
साथ
नक्श-ए-पा
में
है
जुड़
गया
है
दर्द
मुस्तक़बिल
में
मेरे
जुर्म
का
Arihant jain
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