ghubaar-e-abr ban gaya kamaal kar diya gaya | ग़ुबार-ए-अब्र बन गया कमाल कर दिया गया

  - Ahmad Khayal
ग़ुबार-ए-अब्रबनगयाकमालकरदियागया
हरी-भरीरुतोंकोमेरीशालकरदियागया
क़दमक़दमपेकासालेकेज़िंदगीथीराहमें
सोजोभीअपनेपासथानिकालकरदियागया
मैंज़ख़्मज़ख़्महोगयालहूवफ़ाकोरोगया
लड़ाईछिड़गईतोमुझकोढालकरदियागया
गुलाब-रुतकीदेवियाँनगरगुलाबकरगईं
मैंसुर्ख़-रूहुआउसेभीलालकरदियागया
तूकेमुझकोदेखतोग़ुबारकेहिसारमें
तिरेफ़िराक़मेंअजीबहालकरदियागया
वोज़हरहैफ़ज़ाओंमेंकिआदमीकीबातक्या
हवाकासाँसलेनाभीमुहालकरदियागया
  - Ahmad Khayal
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