ग़ुबार-ए-अब्रबनगयाकमालकरदियागया
हरी-भरीरुतोंकोमेरीशालकरदियागया
क़दमक़दमपेकासालेकेज़िंदगीथीराहमें
सोजोभीअपनेपासथानिकालकरदियागया
मैंज़ख़्मज़ख़्महोगयालहूवफ़ाकोरोगया
लड़ाईछिड़गईतोमुझकोढालकरदियागया
गुलाब-रुतकीदेवियाँनगरगुलाबकरगईं
मैंसुर्ख़-रूहुआउसेभीलालकरदियागया
तूआकेमुझकोदेखतोग़ुबारकेहिसारमें
तिरेफ़िराक़मेंअजीबहालकरदियागया
वोज़हरहैफ़ज़ाओंमेंकिआदमीकीबातक्या
हवाकासाँसलेनाभीमुहालकरदियागया