zindagi khauf se tashkeel nahin karne mujhe | ज़िंदगी ख़ौफ़ से तश्कील नहीं करनी मुझे

  - Ahmad Khayal
ज़िंदगीख़ौफ़सेतश्कीलनहींकरनीमुझे
रातसेज़ातकीतकमीलनहींकरनीमुझे
किसीदरवेशकेहुजरेसेअभीआयाहूँ
सोतिरेहुक्मकीतामीलनहींकरनीमुझे
छोड़दीदश्त-नवर्दीभीज़ियाँ-कारीभी
ज़िंदगीअबतिरीतज़लीलनहींकरनीमुझे
दिलकेबाज़ारमेंज़ंजीर-ज़नीहोनीनहीं
आँखभीआँखरहेझीलनहींकरनीमुझे
मैंकिइल्हादकेगिर्दाबमेंआयाहुआहूँ
अबकिसीइल्मकीतहसीलनहींकरनीमुझे
लड़तेरहनाहैतसलसुलसेमुझेसुब्हतलक
औरतलवारभीतब्दीलनहींकरनीमुझे
  - Ahmad Khayal
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