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Afzal Sultanpuri
mujhe tu jaana pahchaana banaa le
mujhe tu jaana pahchaana banaa le | मुझे तू जाना पहचाना बना ले
- Afzal Sultanpuri
मुझे
तू
जाना
पहचाना
बना
ले
नहीं
तो
साँप
का
खाना
बना
ले
मुझे
तू
छोड़
दे
पागल
बनाकर
मगर
पहले
तो
दीवाना
बना
ले
छुपाए
राज़
गर
छुपता
नहीं
तो
हमारे
दिल
को
तह-ख़ाना
बना
ले
- Afzal Sultanpuri
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क्यूँँ
इक
तरफ़
निगाह
जमाए
हुए
हो
तुम
क्या
राज़
है
जो
मुझ
से
छुपाए
हुए
हो
तुम
Shakeel Badayuni
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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अव्वल
तो
तेरी
दोस्ती
पर
शक
नहीं
कोई
और
दूसरा
ये
मुझको
तेरे
राज़
पता
हैं
Tanoj Dadhich
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हम
तो
उस
आँख
के
हैं
देखने
वाले,
देखो
जिस
में
शोख़ी
है
बहुत
और
हया
थोड़ी
सी
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Dagh Dehlvi
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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ये
भँवरे
रौशनी
खो
देंगे
अपनी
आँखों
की
अगर
चमन
में
जो
कलियाँ
नक़ाब
ओढेंगी
Shajar Abbas
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मुँह
पर
नक़ाब-ए-ज़र्द
हर
इक
ज़ुल्फ़
पर
गुलाल
होली
की
शाम
ही
तो
सहर
है
बसंत
की
Lala Madhav Ram Jauhar
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कोर्ट
में
तारीख़
के
ये
सिलसिले
चलते
रहे
और
वो
लड़की
वहाँँ
पर
शर्म
से
ही
मर
गई
Sunny Seher
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तसव्वुर
में
भी
अब
वो
बे-नक़ाब
आते
नहीं
मुझ
तक
क़यामत
आ
चुकी
है
लोग
कहते
हैं
शबाब
आया
Hafeez Jalandhari
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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जिधर
देखा
उधर
नज़र
आया
यार
मेरा
किधर
नज़र
आया
Afzal Sultanpuri
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एक
शायर
से
इश्क़
कर
बैठी
सोचकर
क्या
वो
मुझपे
मर
बैठी
Afzal Sultanpuri
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मजाज़ी
शा'इरी
करने
लगे
थे
हक़ीक़त
ज़िन्दगी
करने
लगे
थे
Afzal Sultanpuri
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हमें
क्यूँ
आज़माया
जा
रहा
है
हमारा
प्यार
ज़ाया'
जा
रहा
है
इधर
हम
याद
करने
में
लगे
हैं
उधर
हमको
भुलाया
जा
रहा
है
दिलों
को
ग़म
बहुत
मिलने
लगा
है
न
जाने
क्यूँ
सताया
जा
रहा
है
यहाँ
से
भेजता
रहता
हूँ
पैसे
मगर
बिल
ही
बकाया
जा
रहा
है
तुम्हें
फिर
रोकना
कैसे
नहीं
हो
दिलों
पे
ज़ोर
ढाया
जा
रहा
है
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Afzal Sultanpuri
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पागलों
की
तरह
मैं
भटकता
रहा
इश्क़
के
नाम
पे
हमने
क्या
क्या
किया
Afzal Sultanpuri
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