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Afzal Sultanpuri
paagalon ki tarah main bhatkata raha
paagalon ki tarah main bhatkata raha | पागलों की तरह मैं भटकता रहा
- Afzal Sultanpuri
पागलों
की
तरह
मैं
भटकता
रहा
इश्क़
के
नाम
पे
हमने
क्या
क्या
किया
- Afzal Sultanpuri
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बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
जान-ए-
मन
बाक़ी
सब
जज़्बात
का
इज़हार
कम
कर
दीजिए
Farhat Ehsaas
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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अगर
बेदाग़
होता
चाँद
तो
अच्छा
नहीं
लगता
मोहब्बत
ख़ूब-सूरत
दाग़
है,
बेदाग़
से
दिल
पर
Umesh Maurya
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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सुने
हैं
मोहब्बत
के
चर्चे
बहुत
सुना
है
कि
हैं
इस
में
ख़र्चे
बहुत
नतीजे
मोहब्बत
के
आए
नहीं
भरे
थे
मगर
हम
ने
पर्चे
बहुत
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S M Afzal Imam
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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मिलता
नहीं
जहाँ
में
कोई
काम
ढंग
का
इक
इश्क़
था
सो
वो
भी
कई
बार
कर
चुके
Nomaan Shauque
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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हाए
वो
इश्क़
छुपाने
के
ज़माने
'मोहन'
याद
आता
है
ग़लत
नाम
से
नंबर
रखना
Balmohan Pandey
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सही
थी
बात
जो
अफ़ज़ल
गए
थे
यहीं
थे
आज
वो
तो
कल
गए
थे
नहीं
हम
देख
पाए
बोल
डाला
हमारी
बात
से
वो
जल
गए
थे
हमें
कूफ़े
बुलाया
ख़त
लिखाकर
यही
सच
है
तभी
करबल
गए
थे
बताने
लग
गए
थे
हम
जहाँ
को
मदीना
से
कभी
मक़्तल
गए
थे
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Afzal Sultanpuri
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उनके
आने
का
वक़्त
हो
गया
है
ईद
मनाने
का
वक़्त
हो
गया
है
Afzal Sultanpuri
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छोड़कर
तुम
भी
मुझे
रमज़ान
में
यूँँ
जा
रहे
अब
मुझे
ये
लग
रहा
जैसे
जुमा
हो
अलविदा
Afzal Sultanpuri
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हमें
पागल
किया
था
चीज़
ने
जो
अरे
बेशक
वही
था
तिल
तुम्हारा
Afzal Sultanpuri
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इश्क़
की
सरहदों
को
पार
करो
कर
सको
गर
तभी
तो
यार
करो
करना
आए
अगर
सलीक़े
से
बे-तहाशा
सनम
को
प्यार
करो
इश्क़
के
नाम
का
हो
तीर
अगर
तीर
सीने
के
आर-पार
करो
उसकी
मर्ज़ी
करे
क़ुबूल
नहीं
अपनी
जानिब
से
बे-शुमार
करो
जो
मोहब्बत
का
सुन
के
दौड़
पड़े
ऐसे
लड़कों
को
होशियार
करो
बीच
रस्ते
अकेला
छोड़े
जो
बीच
रस्ते
में
शर्मशार
करो
जिस्म
को
रौंदने
का
आदी
हो
ऐसे
'आशिक़
को
आश्कार
करो
वो
फरेबी
हुआ
ग़लत
क्या
है
हाँ
मगर
तुम
तो
एतिबार
करो
तुमको
अल्लाह
ख़ुश
रखे
हरदम
ये
दु'आ
रोज़
बार-बार
करो
लौट
आएगा
एक
दिन
'अफ़ज़ल'
सब्र
से
साथ
इंतिज़ार
करो
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Afzal Sultanpuri
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