nazar ke saamne rahna nazar nahin aanaa | नज़र के सामने रहना नज़र नहीं आना

  - Aftab Iqbal Shamim
नज़रकेसामनेरहनानज़रनहींआना
तिरेसिवायेकिसीकोहुनरनहींआना
येइंतिज़ारमगरइख़्तियारमेंभीनहीं
पतातोहैकिउसेउम्रभरनहींआना
येहिजरतेंहैंज़मीनज़माँसेआगेकी
जोजाचुकाहैउसेलौटकरनहींआना
ज़रासीग़ैबकीलुक्नतज़बानमेंलाओ
बग़ैरइसकेसुख़नमेंअसरनहींआना
हरआनेवालानयारास्तादिखाताहै
इसीलिएतोहमेंराहपरनहींआना
ज़रावोदूसरीखिड़कीभीखोलकमरेकी
नहींतोताज़ाहवानेइधरनहींआना
करूँँमसाफ़तेंना-आफ़्रीदाराहोंकी
मुझऐसाबा'दमेंआवारा-सरनहींआना
  - Aftab Iqbal Shamim
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