ik fana ke ghaat utara ek paagal ho gaya | इक फ़ना के घाट उतरा एक पागल हो गया

  - Aftab Iqbal Shamim
इकफ़नाकेघाटउतराएकपागलहोगया
या'नीमंसूबाज़मानेकामुकम्मलहोगया
जिस्मकेबर्फ़ाबमेंआँखेंचमकतीहैंअभी
कौनकहताहैकिउसकाहौसलाशलहोगया
ज़ेहनपरबे-सम्तियोंकीबारिशेंइतनीहुईं
येइलाक़ातोघनेरस्तोंकाजंगलहोगया
इसकलीद-ए-इस्म-ए-ना-मा'लूमसेकैसेखुले
दिलकादरवाज़ाकिअंदरसेमुक़फ़्फ़लहोगया
शो'ला-ज़ार-ए-गुलसेगुज़रेतोसर-ए-आग़ाज़ही
इकशररआँखोंसेउतराख़ूनमेंहलहोगया
शहर-ए-आइंदाकादरियाहैगिरफ़्त-ए-रेगमें
बसकिजोहोनाहैउसकाफ़ैसलाकलहोगया
मौसम-ए-ताख़ीर-ए-गुलआताहैकिसकेनामपर
कौनहैजिसकालहूइसख़ाकमेंहलहोगया
इसक़दरख़्वाबोंकोमसलापा-ए-आहन-पोशने
शौक़काआईनबिल-आख़िरमोअ'त्तलहोगया
  - Aftab Iqbal Shamim
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