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Sohit Singla
jeene ka iraada hai magar phir bhi kahii se
jeene ka iraada hai magar phir bhi kahii se | जीने का इरादा है मगर फिर भी कहीं से
- Sohit Singla
जीने
का
इरादा
है
मगर
फिर
भी
कहीं
से
कोई
तो
इशारा
हो
मिरा
अज़्म
जवाँ
हो
- Sohit Singla
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पा
के
तूफ़ां
का
इशारा
दरिया
तोड़
देता
है
किनारा
दरिया
Abdul Mannan Tarzi
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इशारा
कर
रहे
हैं
बाल
ये
बिखरे
हुए
क्या
तू
मेरे
पास
आया
है
कहीं
होते
हुए
क्या
ये
इतना
हँसने
वाले
इश्क़
में
टूटे
हुए
लोग
तू
इन
से
पूछना
अंदर
से
भी
अच्छे
हुए
क्या
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Kushal Dauneria
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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मैं
साँसें
तक
लुटा
सकता
हूँ
उसके
इक
इशारे
पर
मगर
वो
मेरे
हर
वादे
को
सरकारी
समझता
है
Rahat Indori
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एक
दिन
मेरी
ख़ामुशी
ने
मुझे
लफ़्ज़
की
ओट
से
इशारा
किया
Anjum Saleemi
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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उस
की
ख़ुशबू
को
मेरी
ओर
रवाना
कर
के
ये
हवा
लौट
गई
कुछ
तो
इशारा
कर
के
Shaan
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तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
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भाँप
ही
लेंगे
इशारा
सर-ए-महफ़िल
जो
किया
ताड़ने
वाले
क़यामत
की
नज़र
रखते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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हार
ख़ुद
से
बड़ी
नहीं
कोई
जीतने
को
फ़क़त
नहीं
'आलम
Sohit Singla
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वो
नज़र-अंदाज़
करता
है
मगर
हम
सब
सेे
मिलते
जा
रहे
हैं
चलते
चलते
Sohit Singla
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हसद
को
ज़िंदा
कर
के
देखते
हैं
गली
उसकी
गुज़र
के
देखते
हैं
नहीं
ये
रास
आई
ज़िंदगी
सो
चलो
इक
बार
मर
के
देखते
हैं
सभी
बस
देखते
मंज़िल
मगर
वो
नहीं
दुख
सुख
सफ़र
के
देखते
हैं
नहीं
मैं
देखती
तुमको
अदास
मुझे
ये
बात
कर
के
देखते
हैं
सभी
कहते
हैं
उनको
गुलबदन
सो
ख़ुदी
गुलज़ार
भर
के
देखते
हैं
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Sohit Singla
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बसा
के
दिल
में
मिरा
तुम
'अयाल
रखती
हो
के
बाद
अम्मी
के
तुम
यूँँ
ख़याल
रखती
हो
Sohit Singla
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चलो
करके
जिगर
इज़हार
करता
हूँ
सनम
कैसे
कहूँ
बस
प्यार
करता
हूँ
समझती
हो
मेरी
ख़ामोशी
भी
तुम
तो
बिना
ही
बात
तुमको
ख़्वार
करता
हूँ
मुहब्बत
बढ़ती
है
झगड़े
लड़ाई
से
कभी
तुमको
तभी
बेज़ार
करता
हूँ
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Sohit Singla
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