aseer-e-haafiza ho aaj ke jahaan men aao | असीर-ए-हाफ़िज़ा हो आज के जहान में आओ

  - Aftab Iqbal Shamim
असीर-ए-हाफ़िज़ाहोआजकेजहानमेंआओ
मुकाल
मेंकेलिएअस्रकीज़बानमेंआओ
पएसबात-ए-तग़य्युरपुकारतेहुएगुज़रे
छतेंशिकस्ताहैंनिकलोनएमकानमेंआओ
ज़मींकावक़्तसेझगड़ाहैख़ुदनिपटतेरहेंगे
कहाहैकिसनेकितुमउनकेदरमियानमेंआओ
येआठपहरकीदुनियातुम्हेंबताऊँकिक्याहै
निकलकेजिस्मसेकुछदेरअपनीजानमेंआओ
तुम्हेंतुम्हारीअलिफ़दीदमेंमैंदेखनाचाहूँ
नज़रबचाकेज़मानेसेमेरेध्यानमेंआओ
  - Aftab Iqbal Shamim
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