नस्लेंजोअँधेरेकेमहाज़ोंपेलड़ीहैं
अबदिनकेकटहरेमेंख़ता-वारखड़ीहैं
बे-नामसीआवाज़-ए-शगुफ़्तआईकहींसे
कुछपतियाँशायदशजर-ए-शबसेझड़ीहैं
निकलेंतोशिकस्तोंकेअँधेरेउबलआएँ
रहनेदोजोकिरनेंमिरीआँखोंमेंगड़ीहैं
आडूब!उभरनाहैतुझेअगलेनगरमें
मंज़िलभीबुलातीहैसलीबेंभीखड़ीहैं
जबपासकभीजाएँतोपटभेड़लेंखटसे
क्यालड़कियाँसपनेकेदरीचोंमेंखड़ीहैं
क्यारातकेआशोबमेंवोख़ुदसेलड़ाथा
आईनेकेचेहरेपेख़राशेंसीपड़ीहैं
ख़ामोशियाँउससाहिल-ए-आवाज़सेआगे
पातालसेगहरीहैं,समुंदरसेबड़ीहैं