ye ped ye pahaad zameen ki umang hain | ये पेड़ ये पहाड़ ज़मीं की उमंग हैं

  - Aftab Iqbal Shamim
येपेड़येपहाड़ज़मींकीउमंगहैं
सारेनशेबजिनकीउठानोंपेदंगहैं
बाहरहोहब्सफिरभीदरीचाखुलारखूँ
येख़ुदतसल्लियाँमिरेजीनेकाढंगहैं
ढूँडूँकिइंतिहाकीमुझेइंतिहामिले
येशश-जहातमेरीतमन्नापेतंगहैं
इकउम्रइकमकानकीता'मीरमेंलगे
अय्यामसेज़ियादागराँख़िश्त-ओ-संगहैं
चहकेहज़ारसौतमेंयेताइर-ए-नज़र
किरनोंकेपासयूँँतोयहीसातरंगहैं
वैसेहमेंनदामत-ए-बे-चेहरगीनहीं
हर-चंदतेरेशहरमेंबे-नाम-ओ-नंगहैं
  - Aftab Iqbal Shamim
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