phir bapaa shahar men afraatafri kar jaa.e | फिर बपा शहर में अफ़रातफ़री कर जाए

  - Aftab Iqbal Shamim
फिरबपाशहरमेंअफ़रातफ़रीकरजाए
कोईयेसूखीहुईडारहरीकरजाए
जबभीइक़रारकीकुछरौशनियाँजम्अ''करूँँ
मेरीतरदीदमिरीबे-बसरीकरजाए
मादन-ए-शबसेनिकालेज़र-ए-ख़ुश्बूकर
आएयेमो'जिज़ाबाद-ए-सहरीकरजाए
कसरतेंआएँनज़रज़ातकीयकताईमें
येतमाशाकभीआशुफ़्ता-सरीकरजाए
लम्हामुंसिफ़भीहैमुजरिमभीहैमजबूरीका
फ़ाएदाशककामुझेदेकेबरीकरजाए
उसकामेआ'रहीक्यारोज़बदलजाताहै
छोड़िए!वोजोअगरना-क़दरीकरजाए
  - Aftab Iqbal Shamim
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