main jab bhi choone lagoo tum zaraa pare ho jaao | मैं जब भी छूने लगूँ तुम ज़रा परे हो जाओ

  - Aftab Iqbal Shamim
मैंजबभीछूनेलगूँतुमज़रापरेहोजाओ
येक्याकिलम्समेंआतेहीदूसरेहोजाओ
येकार-ए-इश्क़मगरहमसेकैसेसरज़दहो
अलावतेज़हैसाहबज़रापरेहोजाओ
तुम्हारीउम्रभीउसआबकेहिसाबमेंहै
नहींकिउसकेबरसनेसेतुमहरेहोजाओ
येगोशा-गीरतबीअ'तभीएकमहबसहै
हवाकेलम्समेंआओहरे-भरेहोजाओ
कभीतोमतला-ए-दिलसेहोइतनीबारिश-ए-अश्क
कितुमभीखुलकेबरसतेहुएखरेहोजाओ
  - Aftab Iqbal Shamim
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