apni kaifiyatein har aan badalti hui shaam | अपनी कैफ़िय्यतें हर आन बदलती हुई शाम

  - Aftab Iqbal Shamim
अपनीकैफ़िय्यतेंहरआनबदलतीहुईशाम
मुंजमिदहोतीहुईऔरपिघलतीहुईशाम
डगमगातीहुईहर-गामसँभलतीहुईशाम
ख़्वाब-गाहोंसेउधरख़्वाबमेंचलतीहुईशाम
गूँधकरमोतिएकेहारघनीज़ुल्फ़ोंमें
आरिज़-ओ-लबपेशफ़क़सुर्ख़ियाँमलतीहुईशाम
इकझलकपोशिश-ए-बे-ज़ब्तसेउर्यानीकी
देगईदिनकेनशेबोंसेफिसलतीहुईशाम
एकसन्नाटारग-ओ-पयमेंसदागूँजताहै
बुझगईजैसेलहूमेंकोईजलतीहुईशाम
वक़्तबपतिस्माकरेआब-ए-सितारासेउसे
दस्त-ए-दुनियाकीदराज़ीसेनिकलतीहुईशाम
  - Aftab Iqbal Shamim
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