main apne vaaste rastaa naya nikaalta hooñ | मैं अपने वास्ते रस्ता नया निकालता हूँ

  - Aftab Iqbal Shamim
मैंअपनेवास्तेरस्तानयानिकालताहूँ
दलील-ए-शे'रमेंथोड़ासाकश्फ़डालताहूँ
बहुतसतायाहुआहूँलईमदुनियाका
सख़ीहूँदिलकीपुरानीख़लिशनिकालताहूँ
ज़मानाक्याहैकभीमनकीमौजमेंआऊँ
तोनोक-ए-नक़्शपेअपनीउसेउछालताहूँ
येमेराकुंज-ए-मकाँमेराक़स्र-ए-आलीहै
मैंअपनासिक्का-ए-राएजयहींपेढालताहूँ
मिरीग़ज़लमेंज़न-ओ-मर्दजैसेबाहमहों
इसेजलालताहूँफिरइसेजमालताहूँ
ज़रापढ़ेंतोमिरीइख़्तियारमेंरहें
येनौनिहालजिन्हेंमुश्किलोंसेपालताहूँ
  - Aftab Iqbal Shamim
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