misaal-e-sail-e-balaa na thehre hawa na thehre | मिसाल-ए-सैल-ए-बला न ठहरे हवा न ठहरे

  - Aftab Iqbal Shamim
मिसाल-ए-सैल-ए-बलाठहरेहवाठहरे
लगाएजाएँहज़ारपहरेहवाठहरे
कहींकहींधूपछुप-छुपाकरउतरहीआई
दबीज़बादलहुएइकहरेहवाठहरे
वरक़जबउल्टेकिताब-ए-मौसमदिखाएक्याक्या
गुलाबआरिज़बदनसुनहरेहवाठहरे
वोसाँसउमडीकिबे-हिसोंनेग़ज़बमेंकर
गिरादिएहब्सकेकटहरेहवाठहरे
कभीबदनकेरुएँरुएँमेंहवासेउभरीं
कभीकरेगोशहोशबहरेहवाठहरे
उसीकीरफ़्तार-ए-पासउभरेंनुक़ूश-ए-रंगीं
कहींपेहल्केकहींपेगहरेहवाठहरे
सदा-ए-हर-सूफ़लककेगुम्बदमेंगूँजतीहै
हवाठहरेहवाठहरेहवाठहरे
  - Aftab Iqbal Shamim
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