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Prit
hamse mat poochho kya dekhte hain
hamse mat poochho kya dekhte hain | हम सेे मत पूछो क्या देखते हैं
- Prit
हम
सेे
मत
पूछो
क्या
देखते
हैं
हम
दुखों
में
मज़ा
देखते
हैं
तेरी
फ़ोटो
को
हम
ज़ूम
कर
के
लब,
निगाहें,
गला
देखते
हैं
इन
निगाहों
में
क्या
देखते
हैं?
जाम
औ’
मय-कदा
देखते
हैं
रूह
औ
जिस्म
को
आप
देखो
हम
वफ़ा
में
सज़ा
देखते
हैं
दिल
लगाना
है
घाटे
का
सौदा
लोग
इस
में
नफा
देखते
हैं
आप
को
देख
जब
ख़ुद
को
देखें
हर
तरफ़
हम
ख़ुदा
देखते
हैं
- Prit
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मुन्सिफ़
हो
अगर
तुम
तो
कब
इंसाफ़
करोगे
मुजरिम
हैं
अगर
हम
तो
सज़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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जगह
की
क़ैद
नहीं
थी
कोई
कहीं
बैठे
जहाँ
मक़ाम
हमारा
था
हम
वहीं
बैठे
अमीर-ए-शहर
के
आने
पे
उठना
पड़ता
है
लिहाज़ा
अगली
सफ़ों
में
कभी
नहीं
बैठे
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Mehshar Afridi
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ये
जब्र
भी
देखा
है
तारीख़
की
नज़रों
ने
लम्हों
ने
ख़ता
की
थी
सदियों
ने
सज़ा
पाई
Muzaffar Razmi
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वो
मेरा
जब
न
हो
सका
तो
फिर
यही
सज़ा
रहे
किसी
को
प्यार
जब
करूँँ
वो
छुप
के
देखता
रहे
Mazhar Imam
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मिरे
गुनाह
की
मुझ
को
सज़ा
नहीं
देता
मिरा
ख़ुदा
कहीं
नाराज़
तो
नहीं
मुझ
से
Shahid Zaki
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मैं
हो
गया
हूँ
क़ैद
हज़ारों
रिवाज़
में
मुझको
मेरी
ही
ज़ात
ने
फलने
नहीं
दिया
shaan manral
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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मुझ
से
क्या
हो
सका
वफ़ा
के
सिवा
मुझ
को
मिलता
भी
क्या
सज़ा
के
सिवा
Hafeez Jalandhari
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तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
Fahmi Badayuni
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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अभी
तुमने
मुहब्बत
देखी
है,
नफ़रत
कहाँ
देखी
अभी
सिक्के
का
तुमने
सिर्फ़
इक
ही
पहलू
देखा
है
Prit
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एक
घड़ी
चलती
है
वक़्त
से
आगे
इक
लम्हा
जो
अब
भी
वहीं
ठहरा
है
Prit
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वो
मेरी
फाल्गुनी,
मैं
उसका
माँझी
हूँ
मैं
शब्दों
से
ग़ज़लों
के
पर्वत
खोदूँगा
Prit
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कोई
पलटे
भी
इसको
तो
कैसे
दर्द
का
उल्टा
भी
तो
दर्द
ही
है
Prit
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वो
कभी
मेरे
गले
आ
मिलता
सहरा
में
प्यासे
को
दरिया
मिलता
वो
मेरा
हाथ
पकड़
के
चलता
भटके
नाविक
को
किनारा
मिलता
इश्क़
में
दर्द
मिले
सिर्फ़
और
सिर्फ़
और
कुछ
मिलता
भी
तो
क्या
मिलता
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Prit
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