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Mohit Subran
ye ek sach ki musalsal hamaare hisse men
ye ek sach ki musalsal hamaare hisse men | ये एक सच कि मुसलसल हमारे हिस्से में
- Mohit Subran
ये
एक
सच
कि
मुसलसल
हमारे
हिस्से
में
वही
तो
ज़िन्दगी
आई
जो
हम
ने
चाही
नहीं
- Mohit Subran
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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तल्ख़ियाँ
इस
में
बहुत
कुछ
हैं
मज़ा
कुछ
भी
नहीं
ज़िंदगी
दर्द-ए-मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
Kaleem Aajiz
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खेल
ही
तो
है
जहाँ
मैं
उसका
हूँ
ज़िन्दगी
ये
ट्वीट
बदलेगी
कभी
Neeraj Neer
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तेरे
बग़ैर
भी
तो
ग़नीमत
है
ज़िंदगी
ख़ुद
को
गँवा
के
कौन
तेरी
जुस्तुजू
करे
Ahmad Faraz
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साँस
मेरे
सीने
से
इक-इक
उखड़
जाएगी
तब
भी
देखना
दिल
में
मचलती
एक
बेचैनी
मिलेगी
Mohit Subran
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कुछ
और
देर
हवा
में
कर्तब
दिखलाएगी
और
फिर
ये
मिट्टी,
मिट्टी
में
मिल
जाएगी
Mohit Subran
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दुख
पड़ने
पर
हो
जाता
है
चुप-चाप
आदमी
जब
धूप
पड़ती
है
तो
नदी
सूख
जाती
है
Mohit Subran
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मौत
से
कर
लो
दोस्ती
लोगों
फिर
किसी
दोस्त
की
ज़रूरत
नइँ
Mohit Subran
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बची
ज़ीस्त
में
न
हो
इक़्तिज़ा
कभी
एक-दूसरे
की
हमें
तिरी
भी
गुज़र
हो
मिरे
बिना,
मिरी
भी
बसर
हो
तिरे
बिना
Mohit Subran
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