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Mohit Subran
kuchh aur der hawa men kartab dikhlaayegi
kuchh aur der hawa men kartab dikhlaayegi | कुछ और देर हवा में कर्तब दिखलाएगी
- Mohit Subran
कुछ
और
देर
हवा
में
कर्तब
दिखलाएगी
और
फिर
ये
मिट्टी,
मिट्टी
में
मिल
जाएगी
- Mohit Subran
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रहनुमाओं
की
अदाओं
पे
फ़िदा
है
दुनिया
इस
बहकती
हुई
दुनिया
को
सँभालो
यारो
Dushyant Kumar
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तुम्हारे
साथ
चलने
पर
जो
दिल
राज़ी
नहीं
होता
बहुत
पहले
हम
अपना
फ़ैसला
तब्दील
कर
लेते
Saleem Kausar
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असर
करती
है
कोई-कोई
बात
आहिस्ता
आहिस्ता
समझ
में
आते
हैं
कुछ
मोजज़ात
आहिस्ता
आहिस्ता
Aamir Azher
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अब
तो
उतनी
भी
मुयस्सर
नहीं
मय-ख़ाने
में
जितनी
हम
छोड़
दिया
करते
थे
पैमाने
में
Divakar Rahi
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ये
न
थी
हमारी
क़िस्मत
कि
विसाल-ए-यार
होता
अगर
और
जीते
रहते
यही
इंतिज़ार
होता
Mirza Ghalib
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मुँह
फेर
कर
वो
कहते
हैं
बस
मान
जाइए
इस
शर्म
इस
लिहाज़
के
क़ुर्बान
जाइए
Bekhud Dehelvi
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अपने
होंटों
पर
सजाना
चाहता
हूँ
आ
तुझे
मैं
गुनगुनाना
चाहता
हूँ
Qateel Shifai
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जाते
हुए
कमरे
की
किसी
चीज़
को
छू
दे
मैं
याद
करूँँगा
के
तेरे
हाथ
लगे
थे
Danish Naqvi
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तुम
पूछो
और
मैं
न
बताऊँ
ऐसे
तो
हालात
नहीं
एक
ज़रा
सा
दिल
टूटा
है
और
तो
कोई
बात
नहीं
Qateel Shifai
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बहुत
क़रीब
रही
है
ये
ज़िन्दगी
हम
से
बहुत
अज़ीज़
सही
ए'तिबार
कुछ
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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सुनता
है
भला
कौन
यहाँ
दर्द
किसी
का
मैं
ख़ुश
था
चलो
मेरी
परेशानी
को
पूछा
उस
वक़्त
इन
आँखों
में
मिरी
पानी
भर
आया
जब
शह्र
में
मुझ
से
किसी
ने
पानी
को
पूछा
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Mohit Subran
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ज़ेहन
ज़ख़्मी
है
बद-ख़यालों
से
बात
गर
नफ़सियाती
की
जाती
Mohit Subran
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ये
एक
सच
कि
मुसलसल
हमारे
हिस्से
में
वही
तो
ज़िन्दगी
आई
जो
हम
ने
चाही
नहीं
Mohit Subran
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निकाला
बीच
से
जा
सकता
था
उस
बात
को
लेकिन
ग़लत-फ़हमी
बढ़ी
इतनी
दिलों
को
शक
से
भर
डाला
बहुत
छोटी
सी
कोई
बात
थी
जिस
पे
लड़े
थे
हम
मगर
उस
बात
ने
ही
दरमियाँ
सब
ख़त्म
कर
डाला
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Mohit Subran
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वही
दिल
है
कि
हर
इक
बात
पे
आवाज़
करता
था
वही
दिल
है
किसी
भी
बात
पे
अब
खन
नहीं
करता
वही
चेहरा
है
मैं
अक्सर
कि
जिस
की
क़स्में
खाता
था
वही
चेहरा
है
पर
अब
देखने
का
मन
नहीं
करता
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Mohit Subran
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