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Mohit Subran
sunta hai bhala kaun yahaañ dard kisi ka
sunta hai bhala kaun yahaañ dard kisi ka | सुनता है भला कौन यहाँ दर्द किसी का
- Mohit Subran
सुनता
है
भला
कौन
यहाँ
दर्द
किसी
का
मैं
ख़ुश
था
चलो
मेरी
परेशानी
को
पूछा
उस
वक़्त
इन
आँखों
में
मिरी
पानी
भर
आया
जब
शह्र
में
मुझ
से
किसी
ने
पानी
को
पूछा
- Mohit Subran
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मैं
शा'इर
हूँ
मोहब्बत
का
मिरे
दुख
भी
रसीले
हैं
Farhat Abbas Shah
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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भला
तुम
कैसे
जानोगे
मिला
है
दर्द
जो
गहरा
वो
जैसे
नोचता
है
बाल
अपने
नोच
कर
देखो
Kushal "PARINDA"
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पास
जब
तक
वो
रहे
दर्द
थमा
रहता
है
फैलता
जाता
है
फिर
आँख
के
काजल
की
तरह
Parveen Shakir
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ऐ
ग़म-ए-ज़िंदगी
न
हो
नाराज़
मुझ
को
आदत
है
मुस्कुराने
की
Abdul Hamid Adam
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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ख़ुद
को
उस
वक़्त
निखारा
होता
तो
बुलंदी
पे
सितारा
होता
रोकता
कौन
हमें
दुनिया
में
फिर
गर
उधर
से
भी
इशारा
होता
धूल
से
भर
गई
गुल्लक
वर्ना
मैं
तुझे
सब
से
पियारा
होता
जिस्म
जज़्बात
जिगर
को
मैंने
और
किसी
तन
में
उतारा
होता
यूँँ
न
उलझाता
लटें
ज़िन्दगी
की
ज़ुल्फ़
को
इस
की
सँवारा
होता
बहता
हूँ
दर्द
के
जिस
दरिया
में
कोई
तो
इसका
किनारा
होता
रास
बर्बादी
ही
आई
वर्ना
मैं
हर
इक
आँख
का
तारा
होता
लम्हा
जो
गुज़रा
दो
लम्हे
पहले
लम्हा
वो
हँस
के
गुज़ारा
होता
क्यूँ
दी
आवाज़
तुझे
डूबते
वक़्त
काश
तुझ
को
न
पुकारा
होता
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Mohit Subran
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वो
शोर
हो
रोने
का
कि
हो
शोर
हँसी
का
फिर
शोर
वो
कैसा
भी
हो
बर्दाश्त
नहीं
है
Mohit Subran
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ऐ
मिरी
मौत
मुझे
तुझ
पे
तरस
आ
रहा
है
ले
मैं
ये
ज़ीस्त
तिरे
नाम
किए
देता
हूँ
Mohit Subran
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मुहब्बत
का
ज़र-ओ-दौलत
से
जब
भी
सामना
होगा
वो
कोई
दौर
हो
लेकिन
मुहब्बत
हार
जाएगी
Mohit Subran
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जा
चुका
है
बता
के
वो
अपना
रह
गया
बाक़ी
हिस्सा
हमारा
और
हम
कुछ
नहीं
चाहते
हैं
कोई
बस
सुन
ले
क़िस्सा
हमारा
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Mohit Subran
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