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Mohit Subran
maut se kar lo dosti logon
maut se kar lo dosti logon | मौत से कर लो दोस्ती लोगों
- Mohit Subran
मौत
से
कर
लो
दोस्ती
लोगों
फिर
किसी
दोस्त
की
ज़रूरत
नइँ
- Mohit Subran
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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ऐ
ताइर-ए-लाहूती
उस
रिज़्क़
से
मौत
अच्छी
जिस
रिज़्क़
से
आती
हो
परवाज़
में
कोताही
Allama Iqbal
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मैं
आप
अपनी
मौत
की
तय्यारियों
में
हूँ
मेरे
ख़िलाफ़
आप
की
साज़िश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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अपने
क़ातिल
की
ज़ेहानत
से
परेशान
हूँ
मैं
रोज़
इक
मौत
नए
तर्ज़
की
ईजाद
करे
Parveen Shakir
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बहुत
से
ग़म
समेट
कर
बनाई
एक
डायरी
चुवाव
देख
रात
भर
बनाई
एक
डायरी
ये
हर्फ़
हर्फ़
लफ़्ज़
लफ़्ज़
क़ब्र
है
वरक़
वरक़
दिल-ए-हज़ीं
से
इस
क़दर
बनाई
एक
डायरी
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Aves Sayyad
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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हादसे
ने
किया
जुदा
हमको
मौत
ने
देर
कर
दी
आने
में
Kaif Uddin Khan
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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वही
दिल
है
कि
हर
इक
बात
पे
आवाज़
करता
था
वही
दिल
है
किसी
भी
बात
पे
अब
खन
नहीं
करता
वही
चेहरा
है
मैं
अक्सर
कि
जिस
की
क़स्में
खाता
था
वही
चेहरा
है
पर
अब
देखने
का
मन
नहीं
करता
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Mohit Subran
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मुख़्तसर
इतनी
रही
अपनी
कहानी
'मोहित'
कि
इधर
पैदा
हुए
और
उधर
मर
भी
गए
Mohit Subran
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ये
बात
भूलें
न
नेता
कि
आम
लोगों
ने
जभी
है
चाही
जो
सरकार
वो
गिरा
डाली
Mohit Subran
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उम्र
लग-भग
है
अब
ढही
जाती
इक
ख़लिश
दिल
में
पर
रही
जाती
एक
हद
होती
है
कि
सहने
की
अब
नहीं
ये
घुटन
सही
जाती
मन
को
भी
पढ़ने
की
करो
कोशिश
बात
हर
इक
नहीं
कही
जाती
कैसे
गुज़रेंगे
ख़ुश्कियों
के
दिन
ये
नमी
आँख
से
बही
जाती
तारी
रहती
ये
बे-ख़ुदी
लेकिन
ज़ेहन
से
मेरे
आगही
जाती
जो
कही
जा
चुकी,
सुनी
जा
चुकी
काश
वो
बात
अन-कही
जाती
बस
कि
नाम-ओ-निशान
मिट
जाए
अब
कि
ये
चाह
भी
रही
जाती
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Mohit Subran
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ये
कैसा
इम्तिहाँ
आख़िर
ये
कैसी
आज़माइश
है
समझ
में
आ
गया
है
सब
दिली
क्या
तेरी
ख़्वाहिश
है
अगर
तू
चाहता
है
ऐसा
तो
ले
होने
देता
हूँ
वगरना
जानता
हूँ
पहले
से
क्या
तेरी
साज़िश
है
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Mohit Subran
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