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Mohit Subran
mukhtasar itni rahi apni kahaanii mohit
mukhtasar itni rahi apni kahaanii mohit | मुख़्तसर इतनी रही अपनी कहानी 'मोहित'
- Mohit Subran
मुख़्तसर
इतनी
रही
अपनी
कहानी
'मोहित'
कि
इधर
पैदा
हुए
और
उधर
मर
भी
गए
- Mohit Subran
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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बंद
कमरा,
सर
पे
पंखा,
तीरगी
है
और
मैं
एक
लड़ाई
चल
रही
है
ज़िंदगी
है
औऱ
मैं
Shadab Asghar
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
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यही
है
ख़ासियत
इनकी
यही
इनकी
ख़राबी
है
हो
जो
भी
राज़
इनके
पास
उसको
खोल
देती
हैं
ज़बाँ
चाहे
छुपा
के
बैठ
जाए
बात
गहरे
में
मगर
ये
आँखें
जो
हैं
आँखें
सब
कुछ
बोल
देती
हैं
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Mohit Subran
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सख़्त
थे
जैसे
भी
थे
वैसे
ही
मुमकिन
चाहिए
कुछ
भी
बोलें
आप
हम
से
हम
को
लेकिन
चाहिए
रखिए
अपने
'अच्छे
दिन'
ये
और
सारे
जुमले
भी
हम
को
तो
वापस
हमारे
वो
बुरे
दिन
चाहिए
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Mohit Subran
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जमी
है
गर्द
पुतली
पर
पड़े
हैं
दर्द
कोनों
में
छिपी
है
एक
मुद्दत
से
कोई
ख़ुश्की
सी
पलकों
में
हूँ
कब
से
मुन्तज़िर
बरसात
का
आशा
में
लहरों
के
कि
फूटेंगे
कभी
तो
ग़म
खिलेंगे
अश्क
दीदों
में
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Mohit Subran
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तमाम
ग़म
से
अलम
से
दुखों
से
गुज़रा
है
हर
एक
शख़्स
यहाँ
हादसों
से
गुज़रा
है
Mohit Subran
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मौत
नज़दीक
आ
गई
लेकिन
न
खुला
हम
पे
ज़िन्दगी
क्या
है
Mohit Subran
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