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Mohit Subran
jamee hai gard putli par pade hain dard konon men
jamee hai gard putli par pade hain dard konon men | जमी है गर्द पुतली पर पड़े हैं दर्द कोनों में
- Mohit Subran
जमी
है
गर्द
पुतली
पर
पड़े
हैं
दर्द
कोनों
में
छिपी
है
एक
मुद्दत
से
कोई
ख़ुश्की
सी
पलकों
में
हूँ
कब
से
मुन्तज़िर
बरसात
का
आशा
में
लहरों
के
कि
फूटेंगे
कभी
तो
ग़म
खिलेंगे
अश्क
दीदों
में
- Mohit Subran
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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यारो
कुछ
तो
ज़िक्र
करो
तुम
उस
की
क़यामत
बाँहों
का
वो
जो
सिमटते
होंगे
उन
में
वो
तो
मर
जाते
होंगे
Jaun Elia
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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तकल्लुफ़
छोड़कर
आओ
उसे
फिर
से
जिया
जाए
हमारा
बचपना
जो
एल्बमों
में
क़ैद
रहता
है
Shiva awasthi
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गुज़रता
ही
नहीं
वो
एक
लम्हा
इधर
मैं
हूँ
कि
बीता
जा
रहा
हूँ
Madan Mohan Danish
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शिकारी
से
बचने
में
कैसा
कमाल
निशाने
पे
रहना
बड़ी
बात
है
Shariq Kaifi
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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मुझ
को
बीमार
करेगी
तिरी
आदत
इक
दिन
और
फिर
तुझ
से
भी
अच्छा
नहीं
हो
पाऊँगा
Rahul Jha
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उतर
कर
आसमानों
से
ज़मीं
की
ख़ाक
पर
बैठो
ख़ुदा
ने
सब
सेे
ऊँची
आपको
मसनद
अता
की
है
Pawan mahabodhi
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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ना-कामयाबी
हाथ
से
सब
छीन
लेती
है
इक
दोस्त
तक
नहीं
भला
हिस्से
में
छोड़ती
Mohit Subran
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न
कोई
घर
न
कोई
शख़्स
कुछ
भी
तो
नहीं
बचता
हवा
जब
आग
भर
के
मुँह
में
बस्ती
से
गुज़रती
है
Mohit Subran
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ज़बूँ-हाली
में
घुट-घुट
के
हँसी
धुँदला
गई
वर्ना
कभी
मैं
भी
बहारों
जैसे
खुल
के
मुस्कुराता
था
Mohit Subran
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गुज़ार
लेते
हैं
जैसे
भी
आप
दिन
लेकिन
ये
हम
ही
जानते
हैं
रात
कैसे
कटती
है
Mohit Subran
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किस
को
तमन्ना
फ़त्ह
की
किस
को
ख़याल
अब
जीत
का
मैं
हारने
वाला
हूँ
जो
उस
को
बचा
लूँ
काफ़ी
है
Mohit Subran
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