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Mohit Subran
tamaam gham se alam se dukhon se guzra hai
tamaam gham se alam se dukhon se guzra hai | तमाम ग़म से अलम से दुखों से गुज़रा है
- Mohit Subran
तमाम
ग़म
से
अलम
से
दुखों
से
गुज़रा
है
हर
एक
शख़्स
यहाँ
हादसों
से
गुज़रा
है
- Mohit Subran
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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मैं
तो
मुद्दत
से
ग़ैर-हाज़िर
हूँ
बस
मेरा
नाम
है
रजिस्टर
में
याद
करती
हैं
तुझको
दीवारें
शक्ल
उभर
आई
है
पलस्तर
में
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Azhar Nawaz
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बस
ये
हुआ
कि
उस
ने
तकल्लुफ़
से
बात
की
और
हम
ने
रोते
रोते
दुपट्टे
भिगो
लिए
Parveen Shakir
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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दुखे
हुए
लोगों
की
दुखती
रग
को
छूना
ठीक
नहीं
वक़्त
नहीं
पूछा
करते
हैं
यारों
वक़्त
के
मारों
से
Vashu Pandey
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इस
का
अपनी
ही
रवानी
पर
नहीं
है
इख़्तियार
ज़िंदगी
शिव
की
जटाओं
में
है
गंगा
की
तरह
Ayush Charagh
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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जो
ख़ाली
पेट
हैं
उनकी
मुराद
है
रोटी
वो
जिनके
पेट
भरे
हैं
जहान
चाहते
हैं
Mohit Subran
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दिखेंगी
आँख
जो
भीगीं
क़रीं
कोई
न
आएगा
रखो
मुस्कान
होंठों
पर
भले
ही
झूठी
रक्खो
तुम
Mohit Subran
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कुछ
और
देर
हवा
में
कर्तब
दिखलाएगी
और
फिर
ये
मिट्टी,
मिट्टी
में
मिल
जाएगी
Mohit Subran
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ख़ुदस
नहीं
झुकती
है
अगर
ख़ुदस
झुका
दो
नाकाम
ये
सरकार,
ये
सरकार
गिरा
दो
Mohit Subran
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सख़्त
थे
जैसे
भी
थे
वैसे
ही
मुमकिन
चाहिए
कुछ
भी
बोलें
आप
हम
से
हम
को
लेकिन
चाहिए
रखिए
अपने
'अच्छे
दिन'
ये
और
सारे
जुमले
भी
हम
को
तो
वापस
हमारे
वो
बुरे
दिन
चाहिए
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Mohit Subran
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