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Mohit Subran
bachi zindagi men na ho iqtiza kabhi ek-doosre ki ha
bachi zindagi men na ho iqtiza kabhi ek-doosre ki ha | बची ज़ीस्त में न हो इक़्तिज़ा कभी एक-दूसरे की हमें
- Mohit Subran
बची
ज़ीस्त
में
न
हो
इक़्तिज़ा
कभी
एक-दूसरे
की
हमें
तिरी
भी
गुज़र
हो
मिरे
बिना,
मिरी
भी
बसर
हो
तिरे
बिना
- Mohit Subran
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ये
मेरी
ज़िद
ही
ग़लत
थी
कि
तुझ
सेा
बन
जाऊँ
मैं
अब
न
अपनी
तरह
हूँ
न
तेरे
जैसा
हूँ
हमारे
बीच
ज़माने
की
बदगुमानी
है
मैं
ज़िंदगी
से
ज़रा
कम
ही
बात
करता
हूँ
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Subhan Asad
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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मुख़्तसर
होते
हुए
भी
ज़िन्दगी
बढ़
जाएगी
माँ
की
आँखें
चूम
लीजे
रौशनी
बढ़
जाएगी
Munawwar Rana
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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मुझे
फुर्सत
नहीं
अब
वाक़ई
में
बहुत
मसरूफ
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
में
Reshma Shaikh
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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नहीं
आबो
हवा
में
ताज़गी
अब
दवा
की
सीसियों
में
ज़िन्दगी
है
Umesh Maurya
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तुम्हारी
ज़िंदगी
में
तुम
हमेशा
मुझे
हर
आदमी
में
सुन
सकोगी
सुनोगी
जब
कभी
भी
शे'र
मेरे
तो
ख़ुद
को
शा'इरी
में
सुन
सकोगी
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Sanskar 'Sanam'
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मौत
वो
राज़
जिस
को
जानने
को
कितने
लोगों
ने
ज़िन्दगी
लुटा
दी
Mohit Subran
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सफ़र
कैसे
कटा
उन
रास्तों
को
कौन
गिनता
है
तुम्हारे
सर
पे
बीते
हादसों
को
कौन
गिनता
है
सभी
रखते
हैं
गिन
के
उँगलियों
पर
कामयाबी
को
उठाई
हैं
जो
तुमने
मुश्किलों
को
कौन
गिनता
है
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Mohit Subran
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कभी
कोई
साथी
ज़ख़्म
देता
कभी
मैं
ख़ुद
को
ही
नोच
लेता
है
ज़ख़्म
खाने
में
लुत्फ़
कितना
ये
लुत्फ़
केवल
मुझे
पता
है
Mohit Subran
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ज़रूरत
क्या
तिजारत-गार
को
ख़ुद
हाथ
रँगने
की
ठिकाने
कुछ
लगाना
हो
अगर
सरकार
बैठी
है
Mohit Subran
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नहीं
उतरा
है
कब
से
एक
क़तरा
भी
बयाबाँ
में
कि
ख़ुश्की
फैलती
ही
जा
रही
है
दूर
मिज़्गाँ
में
दिखें
बहती
अगर
आँखें
यूँँ
करना
बहने
देना
तुम
बहुत
मुश्किल
से
आती
है
रवानी
चश्म-ए-वीराँ
में
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Mohit Subran
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